What is Thyroid? थयरॉइड क्या है?

थयरॉइड क्या है? जानिये थयरॉइड के लक्षण

जानिये थयरॉइड के लक्षण व उसके बचाव के उपाय

हेलो फ्रेंड्स,
जैसे की अब तक मेरा यही प्रयास रहा है, की मैं अपने लेखो (Blogs) के द्वारा आपको समय समय पर आपका मानसिक व शारीरिक स्वास्थ किस तरह बेहतर हो, इस बारे में सुझाव देती आयी हूँ|
आज भी मैं आपके समक्ष एक स्वास्थ सम्बंधित विषय (Thyroid) के बारे में कुछ जानकारी अपने इस लेखन के द्वारा देने का प्रयास कर रही हूँ|
आप में से बहुत कम ही लोग अवगत होंगे इस बीमारी के नाम से “थयरॉइड” (Thyroid)|
क्या है ये थयरॉइड? क्या इसके लक्षण है और किस तरह से इस थयरॉइड बीमारी या डिसॉर्डर से बचा जा सकता है? तो आईये जानते है –

Thyroid (थयरॉइड) हमारे गले के अगले हिस्से में स्थित एक ग्रंथि (gland) होती है जो एक तितली नुमा आकर की होती है| ये दो तरह के थयरॉइड हार्मोन्स को बनाती है|

गले के अगले हिस्से में स्थित ग्रंथि (ग्लैंड)

ये थयरॉइड हार्मोन्स हमारे खून के द्वारा हमारे शरीर के सभी आंतरिक अंगो को नियंत्रित करता है| दो तरह के थयरॉइड हार्मोन्स होते है – (i) T3- Traiiodothyronine (ट्राईआयोडोथायरोनिन) (ii) T4- Throxine (थायरोक्सिन)

थयरॉइड हार्मोनस- – (i) T3- Traiiodothyronine (ट्राईआयोडोथायरोनिन) (ii) T4- Throxine (थायरोक्सिन)

यही ग्रंथि शरीर के बेसल मेटाबोलिक रेट (BMR) को नियंत्रित करती है| BMR- हमारे बॉडी को किसी भी काम को करने के लिए जो ऊर्जा शक्ति की जरुरत होती है उसे बेसल मेटाबोलिक रेट (BMR) कहते है, जिसे Calories (कैलोरीस) के रूप में मापा जाता है| थयरॉइड ग्लैंड(Gland) से बनने वाले हार्मोन्स का सीधा असर हमारे BMR पे होता है| इसकी वजह से goiter यानि की घेंघा नामक बीमारी होने का खतरा बना रहता है| T3 और T4 हार्मोन्स का अनुपात हमारे खून में 14:1 होता है| ये हार्मोन्स हमारे शरीर में आयोडीन (Iodine) की कमी की वजह से संतुलन में नहीं रह पाते जिसकी वजह से दो किस्म के थयरॉइड की समस्याए होती है जो आमतौर पे देखी जाती है |

  • Hyperthyroidism (हाइपरथायरायडिज्म / अतिगलग्रंथिता ): जब हमारी थयरॉइड ग्रंथि ज़रुरत से कही अधिक हार्मोन्स उत्त्पन करती है.
  • Hypothyroidism (हाइपोथायरायडिज्म / अवटु-अल्पक्रियता): जब हमारी थयरॉइड ग्रंथि जरुरत से कम हॉर्मोन्स उत्त्पन करती है.

Symptoms of Hyperthyroidism (हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण) – जैसा कि पहले बताया की थयरॉइड हार्मोन्स हमारे शरीर की कई प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, जिनमे से कुछ है – आपका मेटाबोलिक रेट (Metabolic rate), यानी आपकी कितनी कैलोरीज (Calories) बर्न होती है व किस दर से आपके दिल की धड़कन काम कर रही है. ह्यपरथीरोडिस् (Hyperthyroidism) अधिक हार्मोन्स के उत्त्पन होने से होता है और अधिकतर यह महिलाओ में देखा जाता है इसके कुछ लक्षण है –

  • चिड़चिड़ापन
  • मूड स्विंग्स
  • थकान व कमजोरी लगना
  • गर्मी न बर्दास्त कर पाना
  • दिल कि धड़कन बढ़ना या असामान्य धड़कने रहना
  • वजन का तेजी से कम होना
  • पाचन सही न रहना
  • घेंघा होना, जोकि थयरॉइड कि बड़ी दशा है जिसमे गर्दन में सूजन आ जाती है.

Symptoms of Hypothyroidism (हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण)-जब आपकी थयरॉइड ग्रंथि पर्याप्त हरोमेंस नहीं उत्तपन नहीं कर पाती, जितना की हमारे शरीर की प्रक्रियाओं के लिए आवशयक है, उस दशा को ह्य्पोथयरॉडिज़्म कहते है. इस दशा में अक्सर ये लक्षण होते है –

  • थकान लगना
  • जोड़ो में दर्द रहना
  • चेहरे पे सूजन होना
  • ठण्ड बर्दास्त न कर पाना
  • दिल कि धड़कनो का धीमा लगना
  • वजन का तेजी से बढ़ना
  • कब्ज़ होना
  • रूखी त्वचा होना
  • बालो का गिरना व बाल बहुत पतले होना
  • पसीना कम आना
  • मासिक धर्म का अनियमित होना अथवा बहुत मात्रा में शिराव (ब्लीडिंग) होना या प्रजनन शक्ति कम होना.
  • डिप्रेशन होना

यदि आप इनमे से कोई लक्षण महसूस करते हो तो, अपने डॉक्टर की सलाह से थयरॉइड के होने वाले टेस्ट अवश्य कराये. जिनमे कुछ टेस्ट है –
Thyroid-stimulating hormone (TSH)- थयरॉइड – स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन टेस्ट
T4 (thyroxine) – थायरोक्सिन टेस्ट
Thyroid अल्ट्रासाउंड – अल्ट्रासाउंड
Thyroid स्कैन- थयरॉइड स्कैन

अगर सही समय पे थयरॉइड की जानकारी मिल जाए तो इसका प्रभंधन मुमकिन होता है| ये एक ऐसा डिसऑर्डर है जो सिर्फ दवाईयो से पूरी तरह मैनेज नहीं हो पता, इसके लिए विशेष रूप से आपको अपने जीवनशैली में कुछ बतलाव लाना बहुत ही जरुरी है| क्युकी थयरॉइड हमारे आजकल की जीवनशैली से होने वाली बीमारी बन गयी है| जिस तरह आजकल हमारा रहन सहन हो चला है छोटी उम्र के लोगो में भी ये बीमारी बड़ी आम हो गयी है|

जिनको थयरॉइड नहीं है, परन्तु जिनकी जीवनशैली में इन सभी पोषक तत्वों (जैसे कि- विटामिन डी, आयोडीन,प्रोटीन और आयरन) की कमी है और जो वयक्ति जंक फ़ूड का सेवन अधिक करते है; इसके अलावा अगर आपकी जीवन में आप किसी भी तरह का व्यायाम या कसरत नहीं करते तथा ज्यादातर काम बैठके करते है| उन सभी में थयरॉइड होने की आशंका अधिक हो जाती है|

थयरॉइड को सही तरह से मैनेज करने के कुछ सुझाव –

  • अपने खाने में सही नुट्रिशन (nutrition) का प्रयोग करे संतुलित मात्रा में आयोडीन का प्रयोग करे,अपने बच्चो को अभी से प्रचुर मात्रा में आयोडीन दे|
  • विटामिन डी (Vitamin-D) का सेवन करे, या सुप्प्लिमेंट ले| जो लोग सुबह उगते हुए सूर्य कि रोशिनी प्रतिदिन लेते है उनका विटामिन-D अच्छा होता है|
  • पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन डाइट (protein Diet) अपने भोजन में ले|
  • थयरॉइड पेशेंट को जंक फ़ूड (Junk food) का सेवन नहीं करना चाहिए|
  • हरी सब्जिया व् फल खाये जिनसे आपको लोह तत्व (Iron) व् फाइबर (Fiber) मिलते है|
  • सबसे महत्वपूर्ण है जो भी व्यक्ति थयरॉइड की इस बीमारी से ग्रस्त है उन्हें अपनी जीवनशैली में व्यायाम की आदत को लाना अत्यधिक आवशयक है जिसमे योगा (Yoga) बहोत ही लाभदायक होता है.

अगले ब्लॉग में मैं इन्ही योग मुद्राओं के बारे में आपको जानकारी दूंगी| थयरॉइड के बारे में और जानकारी के लिए ये पुस्तक आप अमेज़न से आर्डर कर सकते है|

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