एक चुनाव तनावरहित जीवन जीने का

ध्यान (मैडिटेशन) और योग को अपने जीवनशैली में लाने से आप इस तनावपूर्ण जीवन को सुखमय रूप में जी सकते है!

बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी—, मतलब की जितना जानना चाहोगे उतना ही जान पाओगे और उतना ही आप समझ पाओगे ऐसी ही है ये ज़िंदगी, हर कोई इसको अपने हिसाब से जानता है और जीता है! और ये हमारे हाथ में है की हम इसको किस तरह जीना चाहते है और क्या नया हर रोज सीखते है!
जैसा की पिछले ब्लोग्स में मैंने बात की पॉजिटिव एंड नेगेटिव सोच के बारे अपने विचार प्रस्तुत किये साथ ही ये भी बताया की कैसे हम इनको थोड़ी सी चेतना (अवेयरनेस) के साथ अपने हिसाब से ढाल सकते है! अब ये सभी बाते मुझे अग्रसर करती है ध्यान यानि (मैडिटेशन) और योग की तरफ! क्या है ये ध्यान और योग? क्या सिर्फ सन्यासी या योगी बाबा ही करसकते है? आजकल योग (योगा) और मैडिटेशन (ध्यान) का प्रचलन क्यों है?

तो इन सभी के बारे में आज हम विचार साँझा करेंगे, उम्मीद करती हूँ की आपको ये पोस्ट सहायक हो!
तो मित्रो, पहले हम बुनियाद समझते है ध्यान के बारे में, अंग्रेजी में मैडिटेशन का अर्थ होता है माइंडफुल होना, यानि की अपने मन पे ध्यान देना या एकाग्र होकर मन के और अपने तन के प्रति चेतना में रहना! जब हम अपने मन पे अपना नियंत्रण करने लग जाते है तो धीरे धीरे हमारे मन व तन उसी साँचे में नए परिवर्तन को महसूस करता है, एक नए तरह की ऊर्जा व शक्ति का आभाष करता है! परन्तु यहाँ नियंत्रण का अर्थ ये नहीं की आप जबरदस्ती अपने मन को एकाग्र करने लगे और सोचे की ऐसा नहीं सोचना अथवा वैसा नहीं सोचना, बल्कि ध्यान एक ऐसी क्रिया है जो आपको आपके अंतर्मन से जोड़ती है! वैसे तो हमारी दुनिया में कई तरह के ध्यान (मैडिटेशन) की विधिया है, जिनके बारे में आपको बहुत सी किताबे मिल जाएगी, बहुत सी संस्थाए है जो इसका प्रशिक्छण देती है ! पर मेरे विचार से ध्यान बहुत ही साधारण प्रक्रिया है जो सही तरीके से अभ्यास किया जाए तो आसान होता है! और ध्यान और योग एक ही सिक्के के दो पहलु है! मै यहाँ कोई आपको तरीका नहीं बताउंगी की किस तरह से आप ध्यान करे, उनके लिए जैसे मैंने कहा की आपको ऑनलाइन इंटरनेट पे बहुत कुछ मिलेगा! मेरा मकसद आपको कोई नया तरीका या नयी प्रणाली देने का नहीं है बल्कि ये जानकारी आपके समक्ष लाने का है की यदि आप अपने जीवन जीने का आनंद सही तरीके से अनुभव करना चाहते है तो ध्यान (मैडिटेशन) और योग को अपने जीवनशैली में लाने से आप इस तनावपूर्ण जीवन को सुखमय रूप में जी सकते है!

ये रोज़मर्रा की परेशानियों से सक्षम रूप से निपटने का बहुत ही सफल प्रयोग है ! मैडिटेशन या योग करने से आप सन्यासी नहीं होते, बल्कि आप में जीवन की उन कठिनाईओ से जूझने का साहस और मनोबल का विकास होता है साथ ही आप अपने मन की शक्ति को इतना प्रबल व स्थिर कर लेते है की आपको ये कठनाईया एक तरह की चुनौती और रोमांचकारी अनुभव देती है! जैसे ही आप मैडिटेशन को अपने जीवन की आदत बना लेते है वैसे वैसे आप अनुभव करते जाते है की आपका स्वयं पे नियंत्रण है आप महसूस करेंगे अपने गुस्से में कमी, आप महसूस करेंगे छोटी छोटी बाते जो आपको पहले तनाव देती थी वो अब आप शांत मन से सुलझा लेते है, आप ये भी महसूस करेंगे की आपका मन हर स्थिती में शांत रहता है!
योगा आपकी शारीरिक शक्ति को, आपके शरीर के लचीलेपन को, व स्वासो की प्रकिया को संतुलित करता है वही मैडिटेशन (ध्यान) आपके मन को शशक्त करता है साथ ही मन को बुद्धि को व एकाग्रता को बढ़ाने में सहायता करता है! और भी बहुत से लाभ होते है जो आप योग व ध्यान करने से पा सकते है, पिछले एक दशक से योगा और मैडिटेशन ना केवल भारत में बल्कि अन्य देशो में जैसे यूनाइटेड स्टेट (अमरीका), ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम (लंदन) और भी बहोत सारे स्थानों पे प्रचलन में आ चूका है! क्योकि कई अनुसंधानों व अध्ययन के द्वारा इनके कई फायदे हमारे मस्तिष्क, शरीर एवं हमारे रिश्तो में भी देखे गए है!

जिनमे कुछ कारण योगा और मैडिटेशन के प्रचलन के ये भी है :-

  • ध्यान आपको किसी भी तरह के तनाव को व्यवस्थित करने में मदद करता है। ध्यानपूर्ण तरीके से किया गया स्वास का संचालन हमारे तनाव को तोड़ने व उससे लड़ने की छमता बढ़ता है! शोध में पाया गया है कि ध्यान, मस्तिष्क के “अमिग्डला” नामक क्षेत्र को “शांत” कर सकता है, जो तनाव कि प्रतिक्रिया करता है!
  • निरंतर मैडिटेशन अभ्यास से मानसिक फोकस बेहतर होता है। जैसे जैसे आप ये अभ्यास बार बार करते है और अपनी स्वासो को संतुलन करते है, वैसे ही आपके मस्तिष्क की माश्पेशिया आपको और ज्यादा ध्यान केंद्रित होकर बहु कार्य करने योग्य बनाती है!
  • ध्यान करुणा को बढ़ाता है — अपने प्रति और दूसरों की ओर; अध्ययनों से पता चलता है कि प्यार-दुलार की प्रथाओं से पीड़ितों के प्रति हमारी प्रतिक्रिया बदल सकती है, परोपकारी व्यवहार बढ़ सकता है। आप दूसरे लोगो के प्रति उदार रहते है जिससे की गुस्सा आना बहुत ही काम हो जाता है!

ध्यान और योग की जानकारी के लिए आप अमेज़न से इस किताब को भी आर्डर कर सकते है.

https://amzn.to/36qzQg7

बेहतरीन सोच,बेहतरीन भविष्य

नमस्कार दोस्तों, मेरा पिछले ब्लॉग (blog) “नकारात्मक सोच से सकारात्मक सोच तक का सफर” आपने पढ़ा होगा और मै उम्मीद करती हूँ कि आप सभी को पसंद आया हो! जैसा कि मैंने अपने पिछले ब्लॉग में आपको बताया था; कि किस तरह से हम सभी का दिमाग (मन) यूनिवर्स (ब्रह्माण्ड) से जुड़ा हुआ है, और किस तरह हम नकारात्मकता या सकारातमकता को अपनी जीवनशैली में अनुभव करते है!

तो अपने वायदे के मुताबिक मै आपसे फिर आज जुड़ी हूँ , और आज हम जानेंगे कि कैसे आप अपने भविष्य को और बेहतरीन कर सकते है !
तो दोस्तों, आज एक बात आपको अपने मस्तिष्क में नोट करने लेनी चाहिए या मै ये कहू कि आपको एक ताले कि चाबी दे रही हूँ जो आपको बड़े जतन से अपने पास गाँठ बाँध के रखनी है और वो ये है, कि
“आपका आज ही आपका आने वाला कल संवारता है “
हो सकता है आपमें से कुछ मित्र इस बात से अवगत हो, पर ये भी हो सकता है कि बहुत से ये जानने को उत्सुक हो कि ये कैसे संभव हो सकता है?

तो उसके लिए जैसे मैंने पहले भी बताया था, आपका यह जान लेना बहुत ही जरुरी है कि आपकी सोच ही आपका जीवन का निर्णय करती है, जिसे आप कर्म भी कह सकते है, या यु कह सकते है; ‘जो बीजोगे
वही काटोगे‘! अब यहाँ एक और बात भी आपको जान लेना आवशयक है कि भविष्य जैसी कोई चीज़ नहीं होती, ये मात्र एक मायारूप है! आपके पास हर दिन एक नया ‘आज‘ होता है, इन वर्त्तमान पल से ही आप भविष्य कि कल्पना करते है, जो कि कही भी इस समय मौजूद नहीं होता फिर भी आप उसके बारे में सोचते है, और इसी सोच के आधार पर आप खुद ही उसकी कल्पना करते है और उस कल्पना के मुताबिक उसकी तैयारियों में जुटे रहते है| जबकि हकीकत आपका ‘आज‘ है!

हम एक दम से ना बड़े होते है, ना हि हम एक दमसे ही महान नेता या अभिभावक या एक दम से ही सफल बनते! ये सभी होता है आपके के वर्तमान ‘आज‘ कि श्रंखला के पल पल जुड़ते रहने से! इसका बहुत ही साधारण सा उदहारण है – मान ले आपको अपना वजन कम करना है या फिर आपको सिक्स पैक वाली बॉडी बनानी है, क्या ये आज के आज मुमकिन है? नहीं ना, ठीक वैसे ही जो भी परिणाम हम हासिल करते है वो आज और हर दिन के फोकस (ध्यान देने) के परिणाम स्वरुप हमे मिलते है! तो इसका अर्थ है हमारा आज ही हमारे कल को निर्धारित करता है! इसी से ये भी आप कह सकते है कि आपकी सोच ही आपका भविष्य बनाती है, जिस तरह कि सोच का बीज आप अपने मस्तिष्क/ दिमाग में लाते है उसी तरह के परिणाम आप फसल के रूप में पाते है!

तो ये तो तय है कि आपकी नकारात्मक सोच आपका कल बनेगी, आपका आज इस वजह से ख़राब होता ही है, साथ ही आप अपना भविष्य भी इस नकारात्मक सोच को सोप देते है!

तो दोस्तों, आप अब तक ये तो समझ ही गए होंगे कि हमारी हर सोच या विचार का हमारे जीवन पे क्या प्रभाव होता है!

अब सवाल आता है कि हम इस तरह कि सोच और इस तरह के विचारो को अपने मस्तिष्क में आने से कैसे रोक सकते है?

उसका समाधान भी हमारे ही पास है! ज़िन्दगी मे और अपने काम में सफलता पाने के एक मात्र कुंजी है और वो है आत्म चेतन (सेल्फ अवेयरनेस) और आत्मसंयम (सेल्फ मास्टरी) साधारण शब्दों में यू समझ सकते है कि- आपको अपने हर आने वाले विचार के बारे में पहले से अधिक अवगत रहना है और सवयं ही उसका नियंतरण करना है| एक परीक्षा निरीक्षक कि तरह सचेत रहकर, गलत विचारो को आने से रोकना है!
बिना सचेतना और बिना सवयं नियंतरण के आप अपना आज उसी तरह जियेंगे जिस तरह आपके आपका कल था. आपकी सोच आपका कर्म बनती है जो आपका बर्ताव/आदत बनाती है इन्ही तीनो से आप अपना परिणाम भुगते है|

जो कुछ विचार हमारे दिमाग में चलते है वही हमारा फल सवरूप बनते है! हामरे विचारो कि जड़े हमारी धारणाओं,अनिभूति, रवैये, इछाओ और हमारे आसपास के सामाजिक पारिवारिक वातावरण से भी उत्पन्न होती है! जिस दिन से हम अपने विचारो के पीछे छिपी धारणाओं और अपने रवैयों को सही तरीके से जांचना शुरू कर देंगे और उसके प्रति सजग होंगे तभी हम सही मायने में परिवर्तन ला सकते है ! कुछ भी अच्छा करने के लिए हम तभी खुद को प्रेरित कर सकते है जब हमारे मन कि मनोदशा व् हमारे दृश्टिकोण अच्छे स्वरुप में हो ! एक अच्छी मनोदशा से अच्छी सेहत मिलती है, अच्छी सेहत से अच्छी ऊर्जा जो हमे सफलता पाने के लिए जरुरी होती है और इन सबके फलस्वरूप अच्छा जीवन एवं धन समृद्धि आदि हमारे ऊर्जा से हमे प्राप्त होते है!
तो दोस्तों आज ही निश्चय करे कि आप अपनी सोच को स्वयं निर्धारित करेंगे! और इन सब में आपको मैडिटेशन/ध्यान बहुत सहायक होता है!

On Meditation (Hindi): Kaise Karein Dhyaan?: Param Sukh aur Antrik Shakti ki Praapti