Best Yoga for thyroid disorder

थयरॉइड के लिए कौनसे बेस्ट योगा करे-

आप सभी जानते होंगे की योगा हमारे मानसिक व शारीरिक स्वास्थ तथा जीवनशैली को सुगम और सुचारु एवं संतुलित बनाता है| योग के द्वारा मनुष्य वो सबकुछ प्राप्त कर सकता है जिसे हम आध्यात्म कहते है|
योग न केवल अपने मन व शरीर को संतुलित करने की प्रक्रिया है बल्कि; निरंतर योगा अभ्यास से हमारे शरीर की कई तरह की समस्याओ का समाधान भी होता है, जैसे कि बालो का झड़ना, कोलेस्ट्रॉल (रक्तवसा), मासपेशियो में दर्द, तनाव से मुक्ति, कब्ज, वजन का संतुलन, हार्मोन्स का सही स्तर में होना, थकावट वगैरह| अब इन सभी रोज़मर्रा कि समस्याओ के बहुत से अलग अलग कारण होते है, जिनमे से एक है थयरॉइड|
क्लिक करे जानने के लिए – क्या है ये थयरॉइड?

योगा और थयरॉइड विकार (Yoga and Thyroid disorder) –

Thyroid (थयरॉइड) हमारे गले के अगले हिस्से में स्थित एक ग्रंथि (gland) होती है जो एक तितली नुमा आकर की होती है|थयरॉइड हार्मोन्स दो तरह के होते है|

(i) T3- Traiiodothyronine (ट्राईआयोडोथायरोनिन) (ii) T4- Throxine (थायरोक्सिन) : इन्ही दोनों हॉर्मोन्स के स्तर (लेवल) में असंतुलन होने से थयरॉइड विकार उत्पन होता है| अतः इन हॉर्मोन्स का संतुलन होना बहुत ही महत्वपूर्ण है| यदि इनमे से कोई भी हार्मोन का स्तर बहुत अधिक या बहुत कम होने लगता है तो फलस्वरूप Hyperthyroidism (हाइपरथायरायडिज्म / अतिगलग्रंथिता ) या Hypothyroidism (हाइपोथायरायडिज्म /अवटु-अल्पक्रियता) थयरॉइड हो सकता है| हालांकि डॉक्टर या चिक्तश्क इन हार्मोन्स को सन्तुलिन रखने के लिए औषधि देते है परन्तु हमारी आजकल की जीवनशैली इस बीमारी का पूर्ण ईलाज कर पाने में असमर्थ कर देती है ऐसे में योगा अभ्यास इस थयरॉइड के ईलाज में पूरक सिद्ध हुआ है| जून 2016 में नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन (NCBI) द्वारा किये गए अध्यन में ये पता चला है कि निरंतर 6 माह तक किये गए योगा अभ्यास से थयरॉइड व कोलेस्ट्रॉल में सुधार देखे गए है|

थयरॉइड में कौनसे योगा आसन करे –

थयरॉइड में योगा के आसन जान लेने से पहले यह बहुत जरुरी है कि आपको योग के बेसिक यानिकि आपको थोड़ा बहुत बुनियादी ज्ञान होना चाहिए या इन आसनो को करने से पहले किसी योग निरक्षक से निरिक्षण लेना चाहिए| चूँकि थयरॉइड दो प्रकार के है इसलिए योगा के आसन भी दोनों के लिए भिन्न होते है|

Hypothyroidism (हाइपरथायरायडिज्म) में किये जाने वाले मुख्य आसन

  • सर्वांगासन
  • बीतिलासन मार्जरीआसन
  • हलासन
  • भुजंगासन
  • मतस्य आसन
  • सेतुबंध आसन

सर्वांगासन- जैसा की नाम से ही पता चलता है, सर्वांगासन अर्थात सभी अंगो का आसन, यह एक ऐसा आसन है जिसमे आपके शरीर के लगभग सभी अंग योग में होते है| इस आसन में आप अपने पूरे शरीर को अपने कंधो व् हाथों की सहायता से ऊपर की तरफ उठाते है जिससे खून का प्रवाह सिर की तरफ को होता है, ये आसन ब्लड प्रेशर जिनका कम रहता है उनके लिए भी अच्छा होता है|सर्वांगासन मष्तिस्क को खून पोहचाने में मदद करता है, इस आसान से थयरॉइड ग्लैंड पर दवाब आता है जिससे हार्मोन्स बैलेंस होने में हेल्प मिलती है|

सर्वांगासन करने का तरीका

  • सर्वांगासन करने के लिए सबसे पहले आप योगा मैट पे पीठ के बल लेट जाए| जैसे की शवासन में लेटते है|
  • अब अपने पैरो को जोड़े और हाथो को मैट पे अपने शरीर के बगल में रखे और गहरी सास लेते हुए अब धीरे धीरे अपने पैरो को एक साथ ऊपर की ओर लेकर के जाए|
  • अपने हाथो की सहायता से अपनी कमर को ऊपर की तरफ सीधा होने में सहयोग दे
  • कोशिश करे जितना ज्यादा आप अपनी टांगो को सीधा रख सकते है|
  • लगभग 10 सेकंड तक रुकने का प्रयास करे, और सास छोड़ते हुए वापिस अपने पैरो को घुटनो के पास लाते हुए नीचे की तरफ ले जाए वापिस शवासन में, ध्यान रखे वापिस आते समय झटके से ना आये|
SarvangAsan (सर्वांगासन)

चेतावनी – गर्भवती महिलाये इस आसान को ना करे|

बीतिलासन मार्जरीआसन (Bitilasana Marjaryasana)- यह आसान काऊ और कैट पोज़ (Cow and Cat Pose) के नाम से भी जाना जाता है| यह आसन थयरॉइड ग्रंथि को लाभान्वित करता है, इस आसन में आप अपनी ठोढी को अपनी छाती की तरफ खींचते है और फिर गर्दन को बहार की तरफ खींचते है जिससे थयरॉइड ग्लैड सक्रिय होती है|

बीतिलासन मार्जरीआसन करने का तरीका-

  • अपने हाथों के और घुटनो के बल नीचे झुके, आपके घुटने और हथेली समानांतर हो और आपके कंधे आपके कूल्हों के समान्तर हो और आपकी पीठ सीधी एक लाइन में हो|
  • अब सांस लेते हुए अपने गर्दन को बहार की तरफ खींचे और अपनी रीढ़ की हड्डी को अंदर की तरफ झुकाये लगभग २ से ३ सेकंड रुके
  • अब सांस छोड़ते हुए गर्दन को अंदर की तरफ ले जाते हुए अपनी ठोड़ी को छाती से लगाए और रीढ़ की हड्डी को बाहर की तरफ उठाये
  • अपनी शरीर से तालमेल के अनुसार इस प्रकिर्या को ५-६ बार दोहराये
  • इस आसान को विराम देते हुए वजरासन में आ जाये
बीतिलासन मार्जरीआसन (Bitilasana Marjaryasana)

चेतावनी – गर्भवती महिलाये इस आसान को ना करे|

हलासन (Plough posture)- ये आसन न केवल थयरॉइड ग्लैंड को सक्रिय करता है बल्कि मासपेशियो व कमर के लिए भी फायदेमंद होता है| रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड) का लचीलापन बढ़ाता है

हलासन करने का तरीका –

  • सबसे पहले आप योगा मैट पे पीठ के बल लेट जाए| जैसे की शवासन में लेटते है|
  • अब सांस लेते हुए धीरे धीरे अपने पैरो को उठाये आपके दोनों पैर एक साथ जुड़े हो तथा इन्हे पहले 30 डिग्री के कोण पे फिर, 60 के कोण पे उसके बाद 90 डिग्री के कोण पे ले जाए|
  • अब सांस छोड़ते हुए पैरो को सिर के पीछे की तरफ ले जाए जितना ले जा सकते है, कोशिश करे की आपके पैर जमीन को छू सके, इस समय सांस सामान्य रूप से लेते रहे| चाहे तो पीठ को हाथों से ऊपर की तरफ उठा सकते है|
  • इस आसान को लगभग 15 से 20 सेकंड तक रोकने की कोशिश करे|
  • अब जिस तरफ पैरो को लेकर गए थे उसी क्रम में पहले 90, फिर 60 और फिर 30 डिग्री का कोण बनाते हुए धीरे धीरे शवासन में वापिस आये|
हलासन (Plough posture)

चेतावनी – गर्भवती महिलाये इस आसान को ना करे|

भुजंगासन- (कोबरा पोज़)– भुजंगासन भी गर्दन में खिचाव करता है जिससे थयरॉइड ग्लैड सक्रिय होती है और कमर दर्द में राहत देता है|

भुजंगासन करने का तरीका

  • इस आसान में आप पेट के बल मैट पे लेट जाए और अपने हाथों को कंधो के बगल में पंजो को नीचे रखेंगे|
  • अब अपनी नाभि के बल छाती को ऊपर की तरह उठाना है कोहनियो को अंदर की और रखते हुए गर्दन को ऊपर की तरफ रखना है |
  • सांस लेते हुए कमर से ऊपर के हिस्से को साँप के फन की भांति ऊपर उठाये और गर्दन को ऊपर की तरफ खींचे और सामने दृष्टि केंद्रित करे 10 से 15 सेकंड के लिए इसी अवस्था में रहते हुए सांस लेते रहे |
  • अब सांस छोड़ते हुए नीचे वापिस आये और अपने हाथों को सामने की तरफ रख के सामान्य अवस्था में आ जाये |
भुजंगासन- (कोबरा पोज़)

चेतावनी – गर्भवती महिलाये इस आसान को ना करे|

मतस्य आसन (Fish Pose)– यह फिश पोज़ कहलाता है जो की संस्कृत शब्द ‘मत्स्य’ से बना है,जिसका अर्थ मछली होता है| इस आसान से हमारे शरीर में खून का संचार बढ़ता है इस आसान को करने से थयरॉइड को नियंत्रित करने में लाभ होता है| इसके अलवा ये हमारी रीढ़ व कमर के लिए बहोत ही लाभदायक आसन है |

मतस्य आसन करने का तरीका

  • योग मैट पे पीठ के बल आराम से लेट जाए और अपने हाथों को अपने कूल्हों के नीचे इस तरह से रखे की आपकी हथेली जमीन की तरफ हो और आपके दोनों हाथ कूल्हों के नीचे आ जाए अगर आपको ज्यादा खिचाव लगता है और हाथ नहीं पुहच पाते तो आप हाथों को बिलकुल पास भी रख सकते है|
  • अब गहरी सांस लेते हुए अपने पैरो की तरह देखते हुए ऊपर की ओर उठे ऐसा आपको कोहनियो की सहायता लेते हुए करना है|
  • जैसे ही आप कोहनियो की सहायता से ऊपर की तरफ उठते है वैसे ही आपको अपने सिर की तालु (मध्य भाग) को नीचे की ओर जमीन पे ले जाना है और अपना ध्यान सिर की पिछली साइड केंद्रित करना है|
  • ये आसन 10-15 सेकंड तक सास लेते हुए करना है, ध्यान रखे ये आसान बहुत ही धीरे और आराम से करना है जिससे की गर्दन में कोई झटका ना महसूस हो|
  • अब धीरे से सिर को सीधा रखे और दोनों हाथों को नीचे से बहार हटाए और शरीर को हल्का छोड़ते हुए शवासन में आ जाये और कुछ क्षण आराम करे|
मतस्य आसन (Fish Pose)

सेतुबंध आसन (Bridge Pose)– सेतु बंद का अर्थ है पुल् बनना इस आसन से आप पुलनुमा आकार बनाते है इसलिए इसे सेतुबंध कहा जाता है| ये आसन भी मस्तिष्क को तनावमुक्त शांत रखने के साथ थयरॉइड ग्लैंड को सही तरह से काम करने में सहायक होता है| इस आसन से पेट से जुडी समस्या जैसे कब्ज़,अपचन सही रहता है और पीठ की मासपेशिया मजबूत होती है|

सेतुबंध आसन (Bridge Pose) करने का तरीका

  • इसको करने के लिए मैट पर सीधा लेटे और अपने पैरो को अंदर की तरह मोड़े कूल्हों की तरफ लाये आपके पैर समान्तर हो, और घुटने बहार की तरफ ना निकले हो |
  • अब आप अपने दोनों हाथो को प्रयोग करते हुए अपने टक्नो (एंकल) को पकड़ते हुए गहरी सास ले एवं ऊपर की तरफ इस तरह उठे जैसे पुल्ल का आकर होता है |
  • आपका सिर और हाथ जमीं पर ही होने चाहिए साथ ही आपके घुटने व पैर एक सीध में, इस दौरान सामान्य रूप से सांस लेते रहे |
  • अब धीरे से दोनों हाथों को नीचे से बहार हटाए और शरीर को हल्का छोड़ते हुए शवासन में आ जाये और कुछ क्षण आराम करे |
सेतुबंध आसन (Bridge Pose)

इन सभी आसनो का निरंतर प्रयास ना केवल सिर्फ थयरॉइड को काबू रखता है बल्कि आपके मानसिक सवस्थ और आपके शरीर की अन्य कई समस्याओं में भी लाभप्रद है| योग और किन रोगो से मुक्ति दिलाता है? उसके लिए आप ये पुस्तक अमेज़न से आर्डर करके मंगवा सकते है|

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What is Thyroid? थयरॉइड क्या है?

थयरॉइड क्या है? जानिये थयरॉइड के लक्षण

जानिये थयरॉइड के लक्षण व उसके बचाव के उपाय

हेलो फ्रेंड्स,
जैसे की अब तक मेरा यही प्रयास रहा है, की मैं अपने लेखो (Blogs) के द्वारा आपको समय समय पर आपका मानसिक व शारीरिक स्वास्थ किस तरह बेहतर हो, इस बारे में सुझाव देती आयी हूँ|
आज भी मैं आपके समक्ष एक स्वास्थ सम्बंधित विषय (Thyroid) के बारे में कुछ जानकारी अपने इस लेखन के द्वारा देने का प्रयास कर रही हूँ|
आप में से बहुत कम ही लोग अवगत होंगे इस बीमारी के नाम से “थयरॉइड” (Thyroid)|
क्या है ये थयरॉइड? क्या इसके लक्षण है और किस तरह से इस थयरॉइड बीमारी या डिसॉर्डर से बचा जा सकता है? तो आईये जानते है –

Thyroid (थयरॉइड) हमारे गले के अगले हिस्से में स्थित एक ग्रंथि (gland) होती है जो एक तितली नुमा आकर की होती है| ये दो तरह के थयरॉइड हार्मोन्स को बनाती है|

गले के अगले हिस्से में स्थित ग्रंथि (ग्लैंड)

ये थयरॉइड हार्मोन्स हमारे खून के द्वारा हमारे शरीर के सभी आंतरिक अंगो को नियंत्रित करता है| दो तरह के थयरॉइड हार्मोन्स होते है – (i) T3- Traiiodothyronine (ट्राईआयोडोथायरोनिन) (ii) T4- Throxine (थायरोक्सिन)

थयरॉइड हार्मोनस- – (i) T3- Traiiodothyronine (ट्राईआयोडोथायरोनिन) (ii) T4- Throxine (थायरोक्सिन)

यही ग्रंथि शरीर के बेसल मेटाबोलिक रेट (BMR) को नियंत्रित करती है| BMR- हमारे बॉडी को किसी भी काम को करने के लिए जो ऊर्जा शक्ति की जरुरत होती है उसे बेसल मेटाबोलिक रेट (BMR) कहते है, जिसे Calories (कैलोरीस) के रूप में मापा जाता है| थयरॉइड ग्लैंड(Gland) से बनने वाले हार्मोन्स का सीधा असर हमारे BMR पे होता है| इसकी वजह से goiter यानि की घेंघा नामक बीमारी होने का खतरा बना रहता है| T3 और T4 हार्मोन्स का अनुपात हमारे खून में 14:1 होता है| ये हार्मोन्स हमारे शरीर में आयोडीन (Iodine) की कमी की वजह से संतुलन में नहीं रह पाते जिसकी वजह से दो किस्म के थयरॉइड की समस्याए होती है जो आमतौर पे देखी जाती है |

  • Hyperthyroidism (हाइपरथायरायडिज्म / अतिगलग्रंथिता ): जब हमारी थयरॉइड ग्रंथि ज़रुरत से कही अधिक हार्मोन्स उत्त्पन करती है.
  • Hypothyroidism (हाइपोथायरायडिज्म / अवटु-अल्पक्रियता): जब हमारी थयरॉइड ग्रंथि जरुरत से कम हॉर्मोन्स उत्त्पन करती है.

Symptoms of Hyperthyroidism (हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण) – जैसा कि पहले बताया की थयरॉइड हार्मोन्स हमारे शरीर की कई प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, जिनमे से कुछ है – आपका मेटाबोलिक रेट (Metabolic rate), यानी आपकी कितनी कैलोरीज (Calories) बर्न होती है व किस दर से आपके दिल की धड़कन काम कर रही है. ह्यपरथीरोडिस् (Hyperthyroidism) अधिक हार्मोन्स के उत्त्पन होने से होता है और अधिकतर यह महिलाओ में देखा जाता है इसके कुछ लक्षण है –

  • चिड़चिड़ापन
  • मूड स्विंग्स
  • थकान व कमजोरी लगना
  • गर्मी न बर्दास्त कर पाना
  • दिल कि धड़कन बढ़ना या असामान्य धड़कने रहना
  • वजन का तेजी से कम होना
  • पाचन सही न रहना
  • घेंघा होना, जोकि थयरॉइड कि बड़ी दशा है जिसमे गर्दन में सूजन आ जाती है.

Symptoms of Hypothyroidism (हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण)-जब आपकी थयरॉइड ग्रंथि पर्याप्त हरोमेंस नहीं उत्तपन नहीं कर पाती, जितना की हमारे शरीर की प्रक्रियाओं के लिए आवशयक है, उस दशा को ह्य्पोथयरॉडिज़्म कहते है. इस दशा में अक्सर ये लक्षण होते है –

  • थकान लगना
  • जोड़ो में दर्द रहना
  • चेहरे पे सूजन होना
  • ठण्ड बर्दास्त न कर पाना
  • दिल कि धड़कनो का धीमा लगना
  • वजन का तेजी से बढ़ना
  • कब्ज़ होना
  • रूखी त्वचा होना
  • बालो का गिरना व बाल बहुत पतले होना
  • पसीना कम आना
  • मासिक धर्म का अनियमित होना अथवा बहुत मात्रा में शिराव (ब्लीडिंग) होना या प्रजनन शक्ति कम होना.
  • डिप्रेशन होना

यदि आप इनमे से कोई लक्षण महसूस करते हो तो, अपने डॉक्टर की सलाह से थयरॉइड के होने वाले टेस्ट अवश्य कराये. जिनमे कुछ टेस्ट है –
Thyroid-stimulating hormone (TSH)- थयरॉइड – स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन टेस्ट
T4 (thyroxine) – थायरोक्सिन टेस्ट
Thyroid अल्ट्रासाउंड – अल्ट्रासाउंड
Thyroid स्कैन- थयरॉइड स्कैन

अगर सही समय पे थयरॉइड की जानकारी मिल जाए तो इसका प्रभंधन मुमकिन होता है| ये एक ऐसा डिसऑर्डर है जो सिर्फ दवाईयो से पूरी तरह मैनेज नहीं हो पता, इसके लिए विशेष रूप से आपको अपने जीवनशैली में कुछ बतलाव लाना बहुत ही जरुरी है| क्युकी थयरॉइड हमारे आजकल की जीवनशैली से होने वाली बीमारी बन गयी है| जिस तरह आजकल हमारा रहन सहन हो चला है छोटी उम्र के लोगो में भी ये बीमारी बड़ी आम हो गयी है|

जिनको थयरॉइड नहीं है, परन्तु जिनकी जीवनशैली में इन सभी पोषक तत्वों (जैसे कि- विटामिन डी, आयोडीन,प्रोटीन और आयरन) की कमी है और जो वयक्ति जंक फ़ूड का सेवन अधिक करते है; इसके अलावा अगर आपकी जीवन में आप किसी भी तरह का व्यायाम या कसरत नहीं करते तथा ज्यादातर काम बैठके करते है| उन सभी में थयरॉइड होने की आशंका अधिक हो जाती है|

थयरॉइड को सही तरह से मैनेज करने के कुछ सुझाव –

  • अपने खाने में सही नुट्रिशन (nutrition) का प्रयोग करे संतुलित मात्रा में आयोडीन का प्रयोग करे,अपने बच्चो को अभी से प्रचुर मात्रा में आयोडीन दे|
  • विटामिन डी (Vitamin-D) का सेवन करे, या सुप्प्लिमेंट ले| जो लोग सुबह उगते हुए सूर्य कि रोशिनी प्रतिदिन लेते है उनका विटामिन-D अच्छा होता है|
  • पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन डाइट (protein Diet) अपने भोजन में ले|
  • थयरॉइड पेशेंट को जंक फ़ूड (Junk food) का सेवन नहीं करना चाहिए|
  • हरी सब्जिया व् फल खाये जिनसे आपको लोह तत्व (Iron) व् फाइबर (Fiber) मिलते है|
  • सबसे महत्वपूर्ण है जो भी व्यक्ति थयरॉइड की इस बीमारी से ग्रस्त है उन्हें अपनी जीवनशैली में व्यायाम की आदत को लाना अत्यधिक आवशयक है जिसमे योगा (Yoga) बहोत ही लाभदायक होता है.

अगले ब्लॉग में मैं इन्ही योग मुद्राओं के बारे में आपको जानकारी दूंगी| थयरॉइड के बारे में और जानकारी के लिए ये पुस्तक आप अमेज़न से आर्डर कर सकते है|

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Medical Medium Thyroid Healing: The Truth Behind Hashimoto’s Graves’, Insomnia, Hypothroidism, Thyroid Nodules & Epstein-barr

To know more watch this – https://www.youtube.com/watch?v=-bw15Ol1lLI

एक चुनाव तनावरहित जीवन जीने का

ध्यान (मैडिटेशन) और योग को अपने जीवनशैली में लाने से आप इस तनावपूर्ण जीवन को सुखमय रूप में जी सकते है!

बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी—, मतलब की जितना जानना चाहोगे उतना ही जान पाओगे और उतना ही आप समझ पाओगे ऐसी ही है ये ज़िंदगी, हर कोई इसको अपने हिसाब से जानता है और जीता है! और ये हमारे हाथ में है की हम इसको किस तरह जीना चाहते है और क्या नया हर रोज सीखते है!
जैसा की पिछले ब्लोग्स में मैंने बात की पॉजिटिव एंड नेगेटिव सोच के बारे अपने विचार प्रस्तुत किये साथ ही ये भी बताया की कैसे हम इनको थोड़ी सी चेतना (अवेयरनेस) के साथ अपने हिसाब से ढाल सकते है! अब ये सभी बाते मुझे अग्रसर करती है ध्यान यानि (मैडिटेशन) और योग की तरफ! क्या है ये ध्यान और योग? क्या सिर्फ सन्यासी या योगी बाबा ही करसकते है? आजकल योग (योगा) और मैडिटेशन (ध्यान) का प्रचलन क्यों है?

तो इन सभी के बारे में आज हम विचार साँझा करेंगे, उम्मीद करती हूँ की आपको ये पोस्ट सहायक हो!
तो मित्रो, पहले हम बुनियाद समझते है ध्यान के बारे में, अंग्रेजी में मैडिटेशन का अर्थ होता है माइंडफुल होना, यानि की अपने मन पे ध्यान देना या एकाग्र होकर मन के और अपने तन के प्रति चेतना में रहना! जब हम अपने मन पे अपना नियंत्रण करने लग जाते है तो धीरे धीरे हमारे मन व तन उसी साँचे में नए परिवर्तन को महसूस करता है, एक नए तरह की ऊर्जा व शक्ति का आभाष करता है! परन्तु यहाँ नियंत्रण का अर्थ ये नहीं की आप जबरदस्ती अपने मन को एकाग्र करने लगे और सोचे की ऐसा नहीं सोचना अथवा वैसा नहीं सोचना, बल्कि ध्यान एक ऐसी क्रिया है जो आपको आपके अंतर्मन से जोड़ती है! वैसे तो हमारी दुनिया में कई तरह के ध्यान (मैडिटेशन) की विधिया है, जिनके बारे में आपको बहुत सी किताबे मिल जाएगी, बहुत सी संस्थाए है जो इसका प्रशिक्छण देती है ! पर मेरे विचार से ध्यान बहुत ही साधारण प्रक्रिया है जो सही तरीके से अभ्यास किया जाए तो आसान होता है! और ध्यान और योग एक ही सिक्के के दो पहलु है! मै यहाँ कोई आपको तरीका नहीं बताउंगी की किस तरह से आप ध्यान करे, उनके लिए जैसे मैंने कहा की आपको ऑनलाइन इंटरनेट पे बहुत कुछ मिलेगा! मेरा मकसद आपको कोई नया तरीका या नयी प्रणाली देने का नहीं है बल्कि ये जानकारी आपके समक्ष लाने का है की यदि आप अपने जीवन जीने का आनंद सही तरीके से अनुभव करना चाहते है तो ध्यान (मैडिटेशन) और योग को अपने जीवनशैली में लाने से आप इस तनावपूर्ण जीवन को सुखमय रूप में जी सकते है!

ये रोज़मर्रा की परेशानियों से सक्षम रूप से निपटने का बहुत ही सफल प्रयोग है ! मैडिटेशन या योग करने से आप सन्यासी नहीं होते, बल्कि आप में जीवन की उन कठिनाईओ से जूझने का साहस और मनोबल का विकास होता है साथ ही आप अपने मन की शक्ति को इतना प्रबल व स्थिर कर लेते है की आपको ये कठनाईया एक तरह की चुनौती और रोमांचकारी अनुभव देती है! जैसे ही आप मैडिटेशन को अपने जीवन की आदत बना लेते है वैसे वैसे आप अनुभव करते जाते है की आपका स्वयं पे नियंत्रण है आप महसूस करेंगे अपने गुस्से में कमी, आप महसूस करेंगे छोटी छोटी बाते जो आपको पहले तनाव देती थी वो अब आप शांत मन से सुलझा लेते है, आप ये भी महसूस करेंगे की आपका मन हर स्थिती में शांत रहता है!
योगा आपकी शारीरिक शक्ति को, आपके शरीर के लचीलेपन को, व स्वासो की प्रकिया को संतुलित करता है वही मैडिटेशन (ध्यान) आपके मन को शशक्त करता है साथ ही मन को बुद्धि को व एकाग्रता को बढ़ाने में सहायता करता है! और भी बहुत से लाभ होते है जो आप योग व ध्यान करने से पा सकते है, पिछले एक दशक से योगा और मैडिटेशन ना केवल भारत में बल्कि अन्य देशो में जैसे यूनाइटेड स्टेट (अमरीका), ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम (लंदन) और भी बहोत सारे स्थानों पे प्रचलन में आ चूका है! क्योकि कई अनुसंधानों व अध्ययन के द्वारा इनके कई फायदे हमारे मस्तिष्क, शरीर एवं हमारे रिश्तो में भी देखे गए है!

जिनमे कुछ कारण योगा और मैडिटेशन के प्रचलन के ये भी है :-

  • ध्यान आपको किसी भी तरह के तनाव को व्यवस्थित करने में मदद करता है। ध्यानपूर्ण तरीके से किया गया स्वास का संचालन हमारे तनाव को तोड़ने व उससे लड़ने की छमता बढ़ता है! शोध में पाया गया है कि ध्यान, मस्तिष्क के “अमिग्डला” नामक क्षेत्र को “शांत” कर सकता है, जो तनाव कि प्रतिक्रिया करता है!
  • निरंतर मैडिटेशन अभ्यास से मानसिक फोकस बेहतर होता है। जैसे जैसे आप ये अभ्यास बार बार करते है और अपनी स्वासो को संतुलन करते है, वैसे ही आपके मस्तिष्क की माश्पेशिया आपको और ज्यादा ध्यान केंद्रित होकर बहु कार्य करने योग्य बनाती है!
  • ध्यान करुणा को बढ़ाता है — अपने प्रति और दूसरों की ओर; अध्ययनों से पता चलता है कि प्यार-दुलार की प्रथाओं से पीड़ितों के प्रति हमारी प्रतिक्रिया बदल सकती है, परोपकारी व्यवहार बढ़ सकता है। आप दूसरे लोगो के प्रति उदार रहते है जिससे की गुस्सा आना बहुत ही काम हो जाता है!

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