बेहतरीन सोच,बेहतरीन भविष्य

नमस्कार दोस्तों, मेरा पिछले ब्लॉग (blog) “नकारात्मक सोच से सकारात्मक सोच तक का सफर” आपने पढ़ा होगा और मै उम्मीद करती हूँ कि आप सभी को पसंद आया हो! जैसा कि मैंने अपने पिछले ब्लॉग में आपको बताया था; कि किस तरह से हम सभी का दिमाग (मन) यूनिवर्स (ब्रह्माण्ड) से जुड़ा हुआ है, और किस तरह हम नकारात्मकता या सकारातमकता को अपनी जीवनशैली में अनुभव करते है!

तो अपने वायदे के मुताबिक मै आपसे फिर आज जुड़ी हूँ , और आज हम जानेंगे कि कैसे आप अपने भविष्य को और बेहतरीन कर सकते है !
तो दोस्तों, आज एक बात आपको अपने मस्तिष्क में नोट करने लेनी चाहिए या मै ये कहू कि आपको एक ताले कि चाबी दे रही हूँ जो आपको बड़े जतन से अपने पास गाँठ बाँध के रखनी है और वो ये है, कि
“आपका आज ही आपका आने वाला कल संवारता है “
हो सकता है आपमें से कुछ मित्र इस बात से अवगत हो, पर ये भी हो सकता है कि बहुत से ये जानने को उत्सुक हो कि ये कैसे संभव हो सकता है?

तो उसके लिए जैसे मैंने पहले भी बताया था, आपका यह जान लेना बहुत ही जरुरी है कि आपकी सोच ही आपका जीवन का निर्णय करती है, जिसे आप कर्म भी कह सकते है, या यु कह सकते है; ‘जो बीजोगे
वही काटोगे‘! अब यहाँ एक और बात भी आपको जान लेना आवशयक है कि भविष्य जैसी कोई चीज़ नहीं होती, ये मात्र एक मायारूप है! आपके पास हर दिन एक नया ‘आज‘ होता है, इन वर्त्तमान पल से ही आप भविष्य कि कल्पना करते है, जो कि कही भी इस समय मौजूद नहीं होता फिर भी आप उसके बारे में सोचते है, और इसी सोच के आधार पर आप खुद ही उसकी कल्पना करते है और उस कल्पना के मुताबिक उसकी तैयारियों में जुटे रहते है| जबकि हकीकत आपका ‘आज‘ है!

हम एक दम से ना बड़े होते है, ना हि हम एक दमसे ही महान नेता या अभिभावक या एक दम से ही सफल बनते! ये सभी होता है आपके के वर्तमान ‘आज‘ कि श्रंखला के पल पल जुड़ते रहने से! इसका बहुत ही साधारण सा उदहारण है – मान ले आपको अपना वजन कम करना है या फिर आपको सिक्स पैक वाली बॉडी बनानी है, क्या ये आज के आज मुमकिन है? नहीं ना, ठीक वैसे ही जो भी परिणाम हम हासिल करते है वो आज और हर दिन के फोकस (ध्यान देने) के परिणाम स्वरुप हमे मिलते है! तो इसका अर्थ है हमारा आज ही हमारे कल को निर्धारित करता है! इसी से ये भी आप कह सकते है कि आपकी सोच ही आपका भविष्य बनाती है, जिस तरह कि सोच का बीज आप अपने मस्तिष्क/ दिमाग में लाते है उसी तरह के परिणाम आप फसल के रूप में पाते है!

तो ये तो तय है कि आपकी नकारात्मक सोच आपका कल बनेगी, आपका आज इस वजह से ख़राब होता ही है, साथ ही आप अपना भविष्य भी इस नकारात्मक सोच को सोप देते है!

तो दोस्तों, आप अब तक ये तो समझ ही गए होंगे कि हमारी हर सोच या विचार का हमारे जीवन पे क्या प्रभाव होता है!

अब सवाल आता है कि हम इस तरह कि सोच और इस तरह के विचारो को अपने मस्तिष्क में आने से कैसे रोक सकते है?

उसका समाधान भी हमारे ही पास है! ज़िन्दगी मे और अपने काम में सफलता पाने के एक मात्र कुंजी है और वो है आत्म चेतन (सेल्फ अवेयरनेस) और आत्मसंयम (सेल्फ मास्टरी) साधारण शब्दों में यू समझ सकते है कि- आपको अपने हर आने वाले विचार के बारे में पहले से अधिक अवगत रहना है और सवयं ही उसका नियंतरण करना है| एक परीक्षा निरीक्षक कि तरह सचेत रहकर, गलत विचारो को आने से रोकना है!
बिना सचेतना और बिना सवयं नियंतरण के आप अपना आज उसी तरह जियेंगे जिस तरह आपके आपका कल था. आपकी सोच आपका कर्म बनती है जो आपका बर्ताव/आदत बनाती है इन्ही तीनो से आप अपना परिणाम भुगते है|

जो कुछ विचार हमारे दिमाग में चलते है वही हमारा फल सवरूप बनते है! हामरे विचारो कि जड़े हमारी धारणाओं,अनिभूति, रवैये, इछाओ और हमारे आसपास के सामाजिक पारिवारिक वातावरण से भी उत्पन्न होती है! जिस दिन से हम अपने विचारो के पीछे छिपी धारणाओं और अपने रवैयों को सही तरीके से जांचना शुरू कर देंगे और उसके प्रति सजग होंगे तभी हम सही मायने में परिवर्तन ला सकते है ! कुछ भी अच्छा करने के लिए हम तभी खुद को प्रेरित कर सकते है जब हमारे मन कि मनोदशा व् हमारे दृश्टिकोण अच्छे स्वरुप में हो ! एक अच्छी मनोदशा से अच्छी सेहत मिलती है, अच्छी सेहत से अच्छी ऊर्जा जो हमे सफलता पाने के लिए जरुरी होती है और इन सबके फलस्वरूप अच्छा जीवन एवं धन समृद्धि आदि हमारे ऊर्जा से हमे प्राप्त होते है!
तो दोस्तों आज ही निश्चय करे कि आप अपनी सोच को स्वयं निर्धारित करेंगे! और इन सब में आपको मैडिटेशन/ध्यान बहुत सहायक होता है!

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