डाइबिटीज़ और उसके घरेलु उपचार

डाइबिटीज़ या मधुमेह क्या है?-

डाइबिटीज़ या मधुमेह एक पुरानी बीमारी है यह तब होती है जब हमारा शरीर खाद्य पदार्धो से मिलने वाली शर्करा (शुगर) का उपयोग सही ढंग से नहीं कर पाता है जोकि हमारे शरीर की ऊर्जा का स्रोत होती है| इस में बड़ी भूमिका हमारे पेन्क्रियास (Pancreas) यानि कि अग्नाशय की होती है, जो हमारी बॉडी के लिए इन्सुलिन नामक हार्मोन्स उत्त्पन करता है| यह इन्सुलिन हार्मोन्स हमारे खाने से ग्लूकोस को लेकर हमारी कोशिकाओं (cell) तक पहुँचाता ताकि हमारे शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिल सके| हमारे खून में इस ग्लूकोस (शर्करा) का निर्माण होता है| जब ये ब्लड शर्करा (ब्लड शुगर) बढ़ती है तब यह मधुमेह विकार बनती है| ये ब्लड शुगर के बढ़ने से (जिसको ह्य्परग्लिकेमिया के नाम से भी जाना जाता है) डाइबिटीज़ कई तरह की क्षति हमारे शरीर में पैदा करती है| बढ़ी हुयी शुगर से दिल की बीमारी, आँखों की रोशिनी जाना, लिवर ख़राब होना और गुर्दो का फेल हो जाने जैसे खतनाक समस्याए पैदा हो सकती है| W.H.O के अध्यन के अनुसार 1980 में डाइबिटीज़ से पीड़ित लोगो की संख्या 108 मिलियन थी जोकि अब तक बढ़कर 422 मिलियन के करीब पहुँच गयी है| परन्तु इस बीमारी के बारे में लोगो में बहुत ही कम जागरूकता पायी जाती है|

बहुत से लोग ये नहीं जानते कि शुगर की बीमारी कैसे होती है? मधुमेह के क्या लक्षणहै? मधुमेह के रोगी किस तरह का आहार ले? डाइबिटीज़ के घरेलु उपचार तो आईये जानते है इनके बारे में –

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मुख्यता डाइबिटीज़ दो प्रकार कि होती है

टाइप 1 डाइबिटीज़ यह एक स्थायी स्थिति होती है जिसमें पेन्क्रियास (अग्नाशय) बहुत कम या कोई भी इन्सुलिन नहीं बना पाता है | टाइप 1 अक्सर बच्चो या किशोरावस्था में होता है, इस परिस्थिति में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) गलत तरीके से काम करने लगता है जिसके फलस्वरूप वह इन्सुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है| यह बीमारी लाइलाज होती है, इसके प्रबंधन के लिए शरीर को हर रोज इन्सुलिन का इंजेक्शन खाने से पहले देना पड़ता है |

टाइप 2 डाइबिटीज़- इस अवस्था में पेन्क्रियास (अग्नाशय) इन्सुलिन को कोशिकाओं तक नहीं पहुँचा पाता क्युकी बॉडी (body) की कोशिकाएं उसका प्रतिरोध करती है | या फिर धीरे धीरे उसकी क्षमता को कम कर देता है | चूँकि शुगर कोशिकाओं में नहीं जा पाती इसलिए ये रक्तधारा में पनपती है| यही ब्लड शुगर के अत्यधिक बढ़ जाने से टाइप 2 डाइबिटीज़ होती है| टाइप 2 किसी भी समय हो सकती है इसके हो जाने के प्रमुख कारण अनुवांशिकता, मोटापा, वजन ज्यादा होना या फिर शारीरिक क्रियाओ का कम होना हैं |

डाइबिटीज़ के लक्षण

  • बार बार प्यास लगना
  • बार बार पेशाब आना
  • अत्यधिक भूख लगना
  • अनायास वजन कम होना
  • चिड़चिड़ापन
  • कमजोरी औरअकारण थकावट महसूस होना
  • घाव ठीक न होना या देर से घाव ठीक होना
  • रक्त में संक्रमण होना
  • खुजली या त्वचा रोग
  • सिरदर्द  
  • धुंधला दिखना

डाइबिटीज़/ब्लड शुगर के स्तर (Blood sugar level) की जानकारी –  डाइबिटीज़ के उपचार की आधारशिला उसका सही ज्ञान है| मधुमेह का उपचार, उसको सही तरह से मैनेज करने और अपनी जीवनशैली में सुधार करने से नियंत्रित किया जा सकता है| इसके लिए आपका चिकत्सक एक सही सहलाकर होना चाहिए| उपचार से पहले यह जान लेना आवश्यक है की आप किस टाइप की डाइबिटीज़ से पीड़ित है| उसके लिए आपको अपने खून की जांच करवानी होती है | जिससे सही ब्लड शुगर का लेवल पाता चलता है| आमतौर पे टाइप 2 डाइबिटीज़ ज्यादा पायी गयी है |

सामान्य ब्लड शुगर का स्तर 100 mg /dl से कम, जोकि कम से कम 8 घंटे खाली पेट के बाद की होनी चाहिए| और खाना खाने के 2 घंटे बाद 140 mg/dl से अधिक नहीं होनी चाहिए| अगर ब्लड शुगर लेवल 70 mg/dl से नीचे होता है तो ये आपके लिए खतरे की घंटी हो सकती है इस स्थिति में आपको चक्कर महसूस होंगे, बहुत ज्यादा कमजोरी लगेगी, या आप चलने या खड़े होने में अस्थिर महसूस करते है| यदि आपको ये लक्षण लगे तो तरुंत इसका उपचार करे|

ब्लड शुगर का स्तर यदि खाना खाने से पहले 130 mg/dl और खाने के 180 mg/dl है| तो यह ब्लड शुगर लेवल अधिक है | ज्यादातर शुगर बढ़ने के लक्षण 250 mg/dl से अधिक बढ़ जाने के बाद ही महसूस होते है| जिनमे है पेशाब का अधिक आना, सिर भारी होना, उकाई आना, भूख ज्यादा होना, दस्त लगना इत्यादि| यदि आपको बार बार पेशाब आता है और साथ ही आपको पेशाब वाली जगह पे खुजली या चकत्ते हो रहे है इसका अर्थ है आपको ब्लड शुगर लेवल काफी बड़ा हुआ है | अगर यह 400 mg/dl से अधिक है तो तुरंत डॉक्टर से मिले या उपचार ले|

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मधुमेह के रोगी किस तरह का आहार ले- किसी भी बीमारी को यदि आप संतुलन अवस्था में लाना चाहते है तो सबसे महत्वपूर्ण होता है आहार, जिससे न केवल हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है बल्कि हमें कई तरह के विटामिन्स, पौष्टिक तत्व, रोगो से लड़ने कि ताकत मिलती है| मधुमेह के रोगी का आहार सामान्यता इस तरह से होना चाहिए कि उसमे कार्बोहइड्रेट कि मात्रा बहुत अधिक ना हो व साथ ही ग्लूकोस उस आहार में शामिल ना हो| फाइबर युक्त खाना आपके पाचन किर्या में सहायक होता है ये शुगर लेवल को बढ़ने नहीं देता| निम्नलिखित फल व् आहार ऐसे है जिनमे कम शुगर व् कार्बोहाइड्रेट है साथ ही ये फाइबर और पोस्टिकता से पूर्ण है-

मधुमेह के रोगी का आहार (image credit-Pixabay)
  • हरी पत्तेदार सब्जिया – जैसे पालक, मेथी,सरसो, ब्रोकली, गोभी, आदि|
  • साबुत अनाज – जैसे – भूरा चावल, बाजरा, जौ, चने का आटा, दलिया, साबुत दालें आदि|
  • फल – जैसे – पपीता, नाशपाती, संतरा, जामुन,ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी,आड़ू
  • सब्जिया – करेला, सेम, बीन्स, भिंडी, लौकी, टिंडे, गाजर, मटर, मशरुम आदि|
  • ओमेगा -३ फैट – इसके लिए सेलमन मछली अल्बकोर टूना मछली, जो शाकाहारी है वो अखरोट ले|
  • खाद्य तेल – खाना बनाने के लिए ओलिव आयल या सरसो के तेल का ही प्रयोग करे|
  • कुछ बीज – जैसे चिआ सीड, तरबूज के बीज, खरबूजे के सूखे हुए बीज व्का अलसी के बीज का सेवन भी बहुत अच्छे होते है शुगर के रोगी के लिए|

मधुमेह के रोगी को क्या नहीं खाना चाहिए –

मीठा ना खाये
  • अत्याधिक कार्बोहइड्रेट कि मात्रा व् अत्याधिक ग्लूकोस इंडेक्स वाली चीज़ ना खाये जैसे – आलू, सफ़ेद ब्रेड, सफ़ेद पास्ता, चावल, आम, खरबूज, पाइनएप्पल, कद्दू, अरबी आदि|
  • संतृप्त व ट्रांस फैट – अर्थात तली हुयी या डीप फ्राई कि गयी चीज़ ना खाये जैसे चिप्स, फ्रेंच फ्राइज, टिक्की, पूरी, पकोड़े आदि|
  • मीठे पेय पदार्थ अथवा रिफाइंड शुगर वाली चीज़ो का सेवन ना करे – जैसे कि कोल्ड ड्रिंक,कॉफ़ी, शेक्स
  • केक, पेस्ट्री, मीठे बिस्कुट आदि|
  • नोट- शराब का सेवन व धूम्रपान ना करे यह शुगर के रोगियों के लिए बहुत ही नुकसानदेय है|
शराब का सेवन व धूम्रपान ना करे

डाइबिटीज़ के 7 फायदेमंद घरेलू उपचार-

1- नियमित रूप से व्यायाम करे – प्रतिदिन व्यायाम करने से इन्सुलिन कि सवेदन क्षमता बढ़ती है और साथ आपका वजन नहीं बढ़ता| आप खेलकूद में भी भाग ले सकते है जैसे साईकिल चलना, बैडमिंटन खेलना, तैराकी करना, फुटबॉल खेलना आदि| व्यायाम में आप योगा कर सकते है व जिम में कार्डिओ और वेट लिफ्टिंग जैसे व्यायाम कर सकते है| इन सब में आपकी ब्लड शुगर एनर्जी के रूप में इस्तेमाल होती है|

व्यायाम करे (image credit-Pixabay)

2- कम कार्बोहाइड्रेट और कम ग्लूकोस इंडेक्स (GI) वाला भोजन आहार ले- कार्बोहाइड्रेट खाने से ग्लूकोस का निर्माण होता है, और ये ग्लूकोस हमारे ब्लड शुगर स्तर को और बढ़ाता है| जैसे कि पहले ही जानकारी दी गयी है कि कौनसा खाना अधिक GI और कार्बोहाइड्रेट वाला होता है|फाइबर युक्त खाना कार्बोहाइड्रेट के पाचन व शर्करा के निर्माण को नियंत्रित करता है इसलिए लिए फाइबर (रेशे) युक्त आहार अपने खाने में ज्यादा ले |

3-अधिक से अधिक पानी पिये- पानी आपकी बॉडी को हाइड्रेट करता है (शरीर में पानी कि पूर्ती करता है) पानी ज्यादा पिने से खून का संचार सही ढंग से होता है| क्युकी शुगर की बीमारी कि वजह से बार बार पेशाब आता रहता है, ऐसे में पानी अधिक पीने से डिहाइड्रेशन से बचा जा सकता है और इससे किडनिया भी ठीक रहती है|

अधिक पानी पिये (Image credit-Pixabay)

4-करेला खाये- करेला शुगर के रोगियों के लिए रामबाण की तरह काम करता है| और यह चिकित्सा विज्ञान में एक परंपरागत उपचार भी माना गया है| करेला इन्सुलिन की तरह हमारे कोशिकाओं के लिए काम करता है, यह ग्लूकोस को खून में मिलने नहीं देता तथा उसको सही तरीके से लिवर व मासपेशियो तक पहुचाने में सहायता करता है| इसका उपयोग हफ्ते में 2 से 3 बार करना चाहिए| आप करेले की सब्जी भी खा सकते है या फिर इसको छील कर इसके बीजो को अलग करके इसका जूस बनके पीने से यह बहुत ही फायेदमंद होता है|

करेला (Image credit- pixabay)

5-आमले का उपयोग करे- आमला एक प्रकृति का दिया ऐसा उपहार है जो हर रोग के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है जैसे – आँखों की रोशिनी, बालो की समस्या, इम्युनिटी बढ़ाना आदि| शुगर के लिए भी आमला उतना ही लाभदायक है, क्युकी इसमें विटामिन C की प्रचुर मात्रा पायी जाती है| जो की शरीर में रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है| यह पैनक्रिआस (Pancreas) की अनुकूलता शक्ति को बढ़ाता है जिससे ग्लूकोज़ का स्तर खून में संतुलित रहता है| रोज़ाना आप रोज़ 2-3 आमलों की गुठली को अलग करके जूस बना के खाली पेट इसे पिए, आप चाहे तो १ चम्मच करेला का जूस और एक चम्मच आमले का जूस मिलाकर भी पी सकते है|

आमला (PC-Pixabay)

6-मेथी- मेथी हर भारतीय रसोई में पायी जाने वाली सामग्री है यह भी ब्लड शुगर को संतुलन करने में लाभकारी होती है| इसका उपयोग करने के लिए आप २ चम्मच मेथी दाने को रातभर एक कप पानी में भिगोके रखे और सुबह खाली पेट इस पानी को पी ले इससे आपका ग्लूकोस लेवल सही रहता है|

मेथी दाने

7-एलोवेरा प्लांट (Aloe Vera)– एलोवेरा एक कांटेदार पर अंदर से रसीला पौधा होता है| जो आजकल घरो के गमलो में भी कई लोग उगाते है| अध्यन के द्वारा यह सिद्ध हुआ है की इसके काफी हर्बल फायदे चिकत्सा में है| अक्सर इसका उपयोग त्वचा के लिए क्रीम, लोशन के रूप में किया जाता है| इसमें एंटीबायोटिक गुण होते है| ये लिवर से सम्बंधित बीमारी जैसे की हेपेटाइटिस और घावों को जल्दी भरने में बहुत फायदा करता है| ये ब्लड शुगर के लेवल को संतुलित करता है| इसका जूस और सिरप बाजार में आमतोर पे उपलब्ध होता है| जिसे आप उसमे दिए गये नुस्खे के अनुसार ले सकते है|

AloeVera (image credit- Pixabay)

मधुमेह को यदि आप सही तरह से संतुलित रखेंगे, और जो जानकारी आपको मिली है उसका उपयोग डाइबिटीज़ के नियंतरण के लिए करे तो आप भी इसके कारण होने वाली अन्य बीमारियों से बचाव कर सकते है| ध्यान रहे अगर आप अपने डाइबिटीज़ को आज नज़रअंदाज कर रहे है तो कल यह आपके दिल, लिवर, गुर्दो और आँखों के लिए खतरे की घंटी बन सकती है| संतुलित खाये और व्यायाम करे और स्वस्थ रहे|